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सुनन इब्न माजा

नंबर 4150

नंबर 4150किताब 37, नंबर 51
حَدَّثَنَا سُوَيْدُ بْنُ سَعِيدٍ، حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُسْهِرٍ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ أُتِيَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَوْمًا بِطَعَامٍ سُخْنٍ فَأَكَلَ فَلَمَّا فَرَغَ قَالَ ‏ "‏ الْحَمْدُ لِلَّهِ مَا دَخَلَ بَطْنِي طَعَامٌ سُخْنٌ مُنْذُ كَذَا وَكَذَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah said:“One day some hot food was brought to the Messenger of Allah (ﷺ), and he ate. Then when he had finished he said: ‘Praise is to Allah, no hot food has entered my stomach since such and such a time.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।