حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَلِيٍّ، حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ، قَالَ سَمِعْتُ عُمَرَ بْنَ الْخَطَّابِ، يَقُولُ رَأَيْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَلْتَوِي فِي الْيَوْمِ مِنَ الْجُوعِ مَا يَجِدُ مِنَ الدَّقَلِ مَا يَمْلأُ بِهِ بَطْنَهُ .
It was narrated that Nu’man bin Bashir said:“I heard ‘Umar bin Khattab say: ‘I saw the Messenger of Allah (ﷺ) writhing with hunger during the day, and he could not even find the worst of dates with which to fill his stomach.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Sahih MuslimZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।