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सुनन इब्न माजा

नंबर 4143

नंबर 4143किताब 37, नंबर 44
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ سِنَانٍ، حَدَّثَنَا كَثِيرُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ بُرْقَانَ، حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ الأَصَمِّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، رَفَعَهُ إِلَى النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ لاَ يَنْظُرُ إِلَى صُوَرِكُمْ وَأَمْوَالِكُمْ وَلَكِنْ إِنَّمَا يَنْظُرُ إِلَى أَعْمَالِكُمْ وَقُلُوبِكُمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah, who attributed it to the Prophet (ﷺ), said:“Allah does not look at your forms or your wealth, rather He looks at your deeds and your hearts.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।