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सुनन इब्न माजा

नंबर 4126

नंबर 4126किताब 37, नंबर 27
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَبْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الأَحْمَرُ، عَنْ يَزِيدَ بْنِ سِنَانٍ، عَنْ أَبِي الْمُبَارَكِ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ أَحِبُّوا الْمَسَاكِينَ فَإِنِّي سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَقُولُ فِي دُعَائِهِ ‏ "‏ اللَّهُمَّ أَحْيِنِي مِسْكِينًا وَأَمِتْنِي مِسْكِينًا وَاحْشُرْنِي فِي زُمْرَةِ الْمَسَاكِينِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Sa’eed Al-Khudri said:“Love the poor, for I heard the Messenger of Allah (ﷺ) say in his supplication: ‘O Allah, cause me to live poor and cause me to die poor, and gather me among the poor (on the Day of Resurrection).’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।