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सुनन इब्न माजा

नंबर 4123

नंबर 4123किताब 37, नंबर 24
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، حَدَّثَنَا عِيسَى بْنُ الْمُخْتَارِ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنْ عَطِيَّةَ الْعَوْفِيِّ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ إِنَّ فُقَرَاءَ الْمُهَاجِرِينَ يَدْخُلُونَ الْجَنَّةَ قَبْلَ أَغْنِيَائِهِمْ بِمِقْدَارِ خَمْسِمِائَةِ سَنَةٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Sa’eed Al-Khudri that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“The poor Muhajirun will enter Paradise before the rich, the equivalent of five hundred years.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAl-Albani
  • HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।