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सुनन इब्न माजा

नंबर 4121

नंबर 4121किताब 37, नंबर 22
حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ الْجُبَيْرِيُّ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ عِيسَى، حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ عُبَيْدَةَ، أَخْبَرَنِي الْقَاسِمُ بْنُ مِهْرَانَ، عَنْ عِمْرَانَ بْنِ حُصَيْنٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ يُحِبُّ عَبْدَهُ الْمُؤْمِنَ الْفَقِيرَ الْمُتَعَفِّفَ أَبَا الْعِيَالِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Imran bin Husain that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Allah loves His believing slave who is poor, does not beg and has many children.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Very DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 37 · Zuhd

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।