حَدَّثَنَا الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ الْخَلاَّلُ، حَدَّثَنَا عَوْنُ بْنُ عُمَارَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ الْمُثَنَّى بْنِ ثُمَامَةَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَنَسٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، عَنْ أَبِي قَتَادَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " الآيَاتُ بَعْدَ الْمِائَتَيْنِ " .
It was narrated from Anas bin Malik that Abu Qatadah said:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: “The (lesser) signs (will come) after two hundred (years).’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
MawduAl-Albani
MawduMuhammad Fouad Abd al-Baqi
MawduShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।