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सुनन इब्न माजा

नंबर 3985

नंबर 3985किताब 36, नंबर 60
حَدَّثَنَا حُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ، حَدَّثَنَا جَعْفَرُ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنِ الْمُعَلَّى بْنِ زِيَادٍ، عَنْ مُعَاوِيَةَ بْنِ قُرَّةَ، عَنْ مَعْقِلِ بْنِ يَسَارٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ الْعِبَادَةُ فِي الْهَرْجِ كَهِجْرَةٍ إِلَىَّ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ma’qil bin Yasar that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Worship during the time of bloodshed is like emigrating to me.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Tribulations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।