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सुनन इब्न माजा

नंबर 3975

नंबर 3975किताब 36, नंबर 50
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا خَالِي، يَعْلَى عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ أَبِي الشَّعْثَاءِ، قَالَ قِيلَ لاِبْنِ عُمَرَ إِنَّا نَدْخُلُ عَلَى أُمَرَائِنَا فَنَقُولُ الْقَوْلَ فَإِذَا خَرَجْنَا قُلْنَا غَيْرَهُ ‏.‏ قَالَ كُنَّا نَعُدُّ ذَلِكَ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ النِّفَاقَ ‏.‏
It was narrated that Abu Sha’tha said:“It was said to Ibn ‘Umar: ‘We enter upon our rulers and say one thing, and when we leave we say something else.’ He said: ‘At the time of the Messenger of Allah (ﷺ), we used to regard that as hypocrisy.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Tribulations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।