सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 3972

नंबर 3972किताब 36, नंबर 47
حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ، مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ الْعُثْمَانِيُّ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ سَعْدٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ مَاعِزٍ الْعَامِرِيِّ، أَنَّ سُفْيَانَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ الثَّقَفِيَّ، قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ حَدِّثْنِي بِأَمْرٍ أَعْتَصِمُ بِهِ ‏.‏ قَالَ ‏"‏ قُلْ رَبِّيَ اللَّهُ ثُمَّ اسْتَقِمْ ‏"‏ ‏.‏ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ مَا أَكْثَرُ مَا تَخَافُ عَلَىَّ فَأَخَذَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ بِلِسَانِ نَفْسِهِ ثُمَّ قَالَ ‏"‏ هَذَا ‏"‏ ‏.‏
Sufyan bin ‘Abdullah Thaqafi said:“I said: ‘O Messenger of Allah, tell me of something that I can adhere to.’ He said: ‘Say: “Allah is my Lord,” then stand straight (adhere steadfastly to Islam).’ He said: ‘O Messenger of Allah, what is the thing that you fear most for me?’ The Messenger of Allah (ﷺ) took hold of his own tongue, then he said: ‘This.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 36 · Tribulations

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।