حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو الأَحْوَصِ، عَنْ سِمَاكٍ، عَنْ ثَعْلَبَةَ بْنِ الْحَكَمِ، قَالَ أَصَبْنَا غَنَمًا لِلْعَدُوِّ فَانْتَهَبْنَاهَا فَنَصَبْنَا قُدُورَنَا فَمَرَّ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ بِالْقُدُورِ فَأَمَرَ بِهَا فَأُكْفِئَتْ ثُمَّ قَالَ " إِنَّ النُّهْبَةَ لاَ تَحِلُّ " .
It was narrated that Tha’labah bin Hakam said:“We came across some of the enemy’s sheep and plundered them, and set up our cooking pots. The Prophet (ﷺ) passed by the pots and ordered that they be overturned, then he said: ‘Plunder is not permissible.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
HasanShuaib Al Arnaut
Isnaad HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।