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सुनन इब्न माजा

नंबर 3902

नंबर 3902किताब 35, नंबर 10
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ رُمْحٍ، أَنْبَأَنَا اللَّيْثُ بْنُ سَعْدٍ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ أَنَّهُ قَالَ ‏ "‏ مَنْ رَآنِي فِي الْمَنَامِ فَقَدْ رَآنِي إِنَّهُ لاَ يَنْبَغِي لِلشَّيْطَانِ أَنْ يَتَمَثَّلَ فِي صُورَتِي ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Jabir that the Messenger of Allah (ﷺ) said:“Whoever sees me in a dream has (really) seen me, for Satan cannot appear in my form.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 35 · Interpretation of Dreams

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।