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सुनन इब्न माजा

नंबर 3890

नंबर 3890किताब 34, नंबर 64
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْحَمِيدِ بْنُ حَبِيبِ بْنِ أَبِي الْعِشْرِينَ، حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، أَخْبَرَنِي نَافِعٌ، أَنَّ الْقَاسِمَ بْنَ مُحَمَّدٍ، أَخْبَرَهُ عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ إِذَا رَأَى الْمَطَرَ قَالَ ‏ "‏ اللَّهُمَّ اجْعَلْهُ صَيِّبًا هَنِيئًا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Aishah that when the Messenger of Allah (ﷺ) saw rain, he would say:“Allahumma aj’alhu sayyiban hani’an (O Allah, make it a wholesome rain cloud).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।