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सुनन इब्न माजा

नंबर 3882

नंबर 3882किताब 34, नंबर 56
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بِشْرٍ، ح وَحَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، جَمِيعًا عَنْ عَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ، حَدَّثَنِي هِلاَلٌ، مَوْلَى عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ عَنْ عُمَرَ بْنِ عَبْدِ الْعَزِيزِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ جَعْفَرٍ، عَنْ أُمِّهِ، أَسْمَاءَ ابْنَةِ عُمَيْسٍ قَالَتْ عَلَّمَنِي رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَلِمَاتٍ أَقُولُهُنَّ عِنْدَ الْكَرْبِ ‏ "‏ اللَّهُ اللَّهُ رَبِّي لاَ أُشْرِكُ بِهِ شَيْئًا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Asma’ bint ‘Umais said:“The Messenger of Allah (ﷺ) taught me some words to say at times of distress: Allah! Allahu Rabbi la ushriku bihi shay’an (Allah, Allah is my Lord, I do not associate anything with Him).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।