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सुनन इब्न माजा

नंबर 3850

नंबर 3850किताब 34, नंबर 24
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ كَهْمَسِ بْنِ الْحَسَنِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ بُرَيْدَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّهَا قَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَرَأَيْتَ إِنْ وَافَقْتُ لَيْلَةَ الْقَدْرِ مَا أَدْعُو قَالَ ‏ "‏ تَقُولِينَ اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from 'Aishah that she said:"O Messenger of Allah, what do you think I should say in my supplication, if I come upon Laylatul-Qadr?" He said: "Say: 'Allahumma innaka 'afuwwun tuhibbul-'afwa, fa'fu 'anni (O Allah, You are Forgiving and love forgiveness, so forgive me)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Hasan SahihShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।