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सुनन इब्न माजा

नंबर 3844

नंबर 3844किताब 34, नंबर 18
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ إِسْرَائِيلَ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَمْرِو بْنِ مَيْمُونٍ، عَنْ عُمَرَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ يَتَعَوَّذُ مِنَ الْجُبْنِ وَالْبُخْلِ وَأَرْذَلِ الْعُمُرِ وَعَذَابِ الْقَبْرِ وَفِتْنَةِ الصَّدْرِ ‏.‏ قَالَ وَكِيعٌ يَعْنِي الرَّجُلَ يَمُوتُ عَلَى فِتْنَةٍ لاَ يَسْتَغْفِرُ اللَّهَ مِنْهَا ‏.‏
It was narrated from 'Umar that the :Prophet saas used to seek refuge with Allah from cowardice, miserliness, old age, the torment of the grave and the tribulation of the heart. (Da'if)(One of the narrators) Waki' said: "Meaning when a man dies in a state of tribulation (Fitnah) and does not ask Allah to forgive him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।