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सुनन इब्न माजा

नंबर 3842

नंबर 3842किताब 34, नंबर 16
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مُصْعَبٍ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، عَنْ إِسْحَاقَ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ جَعْفَرِ بْنِ عِيَاضٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ تَعَوَّذُوا بِاللَّهِ مِنَ الْفَقْرِ وَالْقِلَّةِ وَالذِّلَّةِ وَأَنْ تَظْلِمَ أَوْ تُظْلَمَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that :the Messenger of Allah (saas) said: "Seek refuge with Allah from poverty, insufficiency and humiliation, and from wronging (others) and being wronged
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।