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सुनन इब्न माजा

नंबर 3828

नंबर 3828किताब 34, नंबर 2
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ ذَرِّ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ الْهَمْدَانِيِّ، عَنْ يُسَيْعٍ الْكِنْدِيِّ، عَنِ النُّعْمَانِ بْنِ بَشِيرٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏"‏ إِنَّ الدُّعَاءَ هُوَ الْعِبَادَةُ ‏"‏ ‏.‏ ثُمَّ قَرَأَ ‏{وَقَالَ رَبُّكُمُ ادْعُونِي أَسْتَجِبْ لَكُمْ}‏ ‏.‏
It was narrated from Nu'man bin Bashir that :the Messenger of Allah (saas) said: "Indeed the supplication is the worship." Then he recited: "And your Lord said: Invoke Me, I will respond to you
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 34 · Supplication

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।