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सुनन इब्न माजा

नंबर 3818

नंबर 3818किताब 33, नंबर 162
حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ عُثْمَانَ بْنِ سَعِيدِ بْنِ كَثِيرِ بْنِ دِينَارٍ الْحِمْصِيُّ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عِرْقٍ، سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ بُسْرٍ، يَقُولُ قَالَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ طُوبَى لِمَنْ وَجَدَ فِي صَحِيفَتِهِ اسْتِغْفَارًا كَثِيرًا ‏"‏ ‏.‏
Abdullah bin Busr said that :the Prophet (saas) said: "Glad tidings to those who find a lot of seeking forgiveness in the record of their deeds
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Etiquette

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।