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सुनन इब्न माजा

नंबर 3812

नंबर 3812किताब 33, नंबर 156
حَدَّثَنَا نَصْرُ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْوَشَّاءُ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ الْمُحَارِبِيُّ، عَنْ مَالِكِ بْنِ أَنَسٍ، عَنْ سُمَىٍّ، عَنْ أَبِي صَالِحٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ ‏ "‏ مَنْ قَالَ سُبْحَانَ اللَّهِ وَبِحَمْدِهِ مِائَةَ مَرَّةٍ غُفِرَتْ لَهُ ذُنُوبُهُ وَلَوْ كَانَتْ مِثْلَ زَبَدِ الْبَحْرِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that :the Messenger of Allah (ﷺ) said: "Whoever says: Subhan Allahi wa bi hamdihi (Glory and praise is to Allah) one hundred times, his sins will be forgiven even if they were like the foam of the sea
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Etiquette

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।