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सुनन इब्न माजा

नंबर 3753

नंबर 3753किताब 33, नंबर 97
حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عَمَّارٍ، حَدَّثَنَا الْهِقْلُ بْنُ زِيَادٍ، حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَامِرٍ الأَسْلَمِيِّ، عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ لاَ يَقُصُّ عَلَى النَّاسِ إِلاَّ أَمِيرٌ أَوْ مَأْمُورٌ أَوْ مُرَاءٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Amr bin Shuaib, from his father, from his grandfather, that the Messenger of Allah(ﷺ) said:"No one tells the stories to the people (for the purpose of exhortation) except a ruler, one appointed by a ruler, or a show-off
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Etiquette

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।