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सुनन इब्न माजा

नंबर 3695

नंबर 3695किताब 33, नंबर 39
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا سَعِيدُ بْنُ أَبِي سَعِيدٍ الْمَقْبُرِيُّ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَجُلاً، دَخَلَ الْمَسْجِدَ وَرَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ جَالِسٌ فِي نَاحِيَةِ الْمَسْجِدِ فَصَلَّى ثُمَّ جَاءَ فَسَلَّمَ فَقَالَ ‏ "‏ وَعَلَيْكَ السَّلاَمُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that:"a man entered the masjid, and the Messenger of Allah(ﷺ) was sitting in a corner of the mosque. He prayed, then he came and greeted him with Salam(peace), and he said: 'Wa 'alaikassalm
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Etiquette

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।