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सुनन इब्न माजा

नंबर 3681

नंबर 3681किताब 33, नंबर 25
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ أَبَانَ بْنِ صَمْعَةَ، عَنْ أَبِي الْوَازِعِ الرَّاسِبِيِّ، عَنْ أَبِي بَرْزَةَ الأَسْلَمِيِّ، قَالَ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ دُلَّنِي عَلَى عَمَلٍ أَنْتَفِعُ بِهِ ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ اعْزِلِ الأَذَى عَنْ طَرِيقِ الْمُسْلِمِينَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Barzah Al-Aslami said:"O Messenger of Allah! Tell me of an action by which I may benefit.' He said: 'Remove harmful things from the path of the Muslims
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Etiquette

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।