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सुनन इब्न माजा

नंबर 3663

नंबर 3663किताब 33, नंबर 7
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ أَبِي عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِي الدَّرْدَاءِ، سَمِعَ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَقُولُ ‏ "‏ الْوَالِدُ أَوْسَطُ أَبْوَابِ الْجَنَّةِ فَأَضِعْ ذَلِكَ الْبَابَ أَوِ احْفَظْهُ ‏"‏ ‏.‏
Abu Darda' heard the Prophet (ﷺ) say that:"The father is the middle door of Paradise (i.e. the best way to Paradise), so it is up to you whether you take advantage of it or not
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Etiquette

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।