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सुनन इब्न माजा

नंबर 3658

नंबर 3658किताब 33, नंबर 2
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ، مُحَمَّدُ بْنُ مَيْمُونٍ الْمَكِّيُّ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنْ عُمَارَةَ بْنِ الْقَعْقَاعِ، عَنْ أَبِي زُرْعَةَ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالُوا يَا رَسُولَ اللَّهِ مَنْ أَبَرُّ قَالَ ‏"‏ أُمَّكَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ ثُمَّ مَنْ قَالَ ‏"‏ أُمَّكَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ ثُمَّ مَنْ قَالَ ‏"‏ أَبَاكَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ ثُمَّ مَنْ قَالَ ‏"‏ الأَدْنَى فَالأَدْنَى ‏"‏ ‏.‏
Abu Hurairah, may Allah be pleased with them, said that:Allah's Messenger said: "They said: 'O Messenger of Allah, whom should I treat kindly?' He said: 'Your mother.' He said: 'Then who?' He said :'Your mother." He said: 'Then who?' He said: 'Your father'. He said : 'Then who?' He said: 'The next closest and the next closest
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 33 · Etiquette

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।