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सुनन इब्न माजा

नंबर 3621

नंबर 3621किताब 32, नंबर 72
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، سَمِعَ أَبَا سَلَمَةَ، وَسُلَيْمَانَ بْنَ يَسَارٍ، يُخْبِرَانِ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، يَبْلُغُ بِهِ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ إِنَّ الْيَهُودَ وَالنَّصَارَى لاَ يَصْبُغُونَ فَخَالِفُوهُمْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah attributed to the Prophet (ﷺ):“The Jews and the Christians do not dye (their hair), so differ from them.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · Chapters on Dress

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।