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सुनन इब्न माजा

नंबर 3611

नंबर 3611किताब 32, नंबर 62
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحِيمِ بْنُ سُلَيْمَانَ، عَنْ لَيْثٍ، عَنْ شَهْرِ بْنِ حَوْشَبٍ، عَنْ سَلْمَانَ، قَالَ كَانَ لِبَعْضِ أُمَّهَاتِ الْمُؤْمِنِينَ شَاةٌ فَمَاتَتْ فَمَرَّ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ عَلَيْهَا فَقَالَ ‏ "‏ مَا ضَرَّ أَهْلَ هَذِهِ لَوِ انْتَفَعُوا بِإِهَابِهَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Salman said:“One of the Mothers of the Believers had a sheep that died. The Messenger of Allah (ﷺ) passed by it and said: ‘It would not have harmed its owners if they had made use of its hide.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • Sahih LighairihiMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 32 · Chapters on Dress

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।