حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبَادَةَ، وَمُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ الْوَاسِطِيَّانِ، قَالاَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ هَارُونَ، أَنْبَأَنَا شَرِيكٌ، عَنْ عُثْمَانَ بْنِ أَبِي زُرْعَةَ، عَنْ مُهَاجِرٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ " مَنْ لَبِسَ ثَوْبَ شُهْرَةٍ أَلْبَسَهُ اللَّهُ يَوْمَ الْقِيَامَةِ ثَوْبَ مَذَلَّةٍ " .
It was narrated that Ibn ‘Umar said:“The Messenger of Allah (ﷺ) said: ‘Whoever wears a garment of pride and vanity, Allah will clothe him, on the Day of Resurrection, in a garment of humiliation.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
HasanAl-Albani
HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
HasanShuaib Al Arnaut
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।