حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرٍ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ بْنُ عُيَيْنَةَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عَطَاءِ بْنِ يَزِيدَ اللَّيْثِيِّ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ نَهَى عَنْ لِبْسَتَيْنِ فَأَمَّا اللِّبْسَتَانِ فَاشْتِمَالُ الصَّمَّاءِ وَالاِحْتِبَاءُ فِي الثَّوْبِ الْوَاحِدِ لَيْسَ عَلَى فَرْجِهِ مِنْهُ شَىْءٌ .
It was narrated from Abu Sa’eed Al-Khudri that the Prophet (ﷺ) forbade two kinds of dress. Those two types of dress are Ishtimalus- Samma’* and Ihtiba’ in a single garment, with no part of it upon his private part
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihShuaib Al Arnaut
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।