حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ إِدْرِيسَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عُمَارَةَ، عَنْ أَبِي بَكْرِ بْنِ مُحَمَّدٍ، أَنَّ خَالِدَةَ بِنْتَ أَنَسٍ أُمَّ بَنِي حَزْمٍ السَّاعِدِيَّةَ، جَاءَتْ إِلَى النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَعَرَضَتْ عَلَيْهِ الرُّقَى فَأَمَرَهَا بِهَا .
It as narrated from Abu Bakr bin Muhammad that Khalidah bint Anas, the mother of Banu Hazm As-Sa’idiyyah, came to the Prophet (ﷺ) and recited a Ruqyah to him, and he told her to use it
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifAl-Albani
DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
HasanShuaib Al Arnaut
Isnaad HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।