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सुनन इब्न माजा

नंबर 3506

नंबर 3506किताब 31, नंबर 71
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنَا عَمَّارُ بْنُ رُزَيْقٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عِيسَى، عَنْ أُمَيَّةَ بْنِ هِنْدٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَامِرِ بْنِ رَبِيعَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ الْعَيْنُ حَقٌّ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Abdullah bin ‘Amir bin Rabi’ah, from his father, that the Prophet (ﷺ) said:“The evil eye is real.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih MutawatirAl-Albani
  • Sahih MutawatirMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 31 · Chapters on Medicine

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।