حَدَّثَنَا أَبُو بِشْرٍ، بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ سَهْلٍ، حَدَّثَنَا أَبُو حَمْزَةَ الْعَطَّارُ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ أُهْدِيَ لِلنَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ عَسَلٌ فَقَسَمَ بَيْنَنَا لُعْقَةً لُعْقَةً فَأَخَذْتُ لُعْقَتِي ثُمَّ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَزْدَادُ أُخْرَى قَالَ " نَعَمْ " .
It was narrated that Jabir bin ‘Abdullah said:“Some honey was given as a gift to the Prophet (ﷺ), and he shared among us spoonful by spoonful. I took my spoonful then I said: ‘O Messenger of Allah, can I have another?’ He said: ‘Yes.’”
स्रोत में दर्ज दर्जे
Daif IsnaadAl-Albani
Daif IsnaadMuhammad Fouad Abd al-Baqi
DaifShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।