حَدَّثَنَا أَبُو كُرَيْبٍ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ صَبِيحٍ، عَنْ أَبِي إِسْرَائِيلَ، عَنْ أَبِي عُمَرَ الْبَهْرَانِيِّ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كَانَ يُنْبَذُ لِرَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَيَشْرَبُهُ يَوْمَهُ ذَلِكَ وَالْغَدَ وَالْيَوْمَ الثَّالِثَ فَإِنْ بَقِيَ مِنْهُ شَىْءٌ أَهْرَاقَهُ أَوْ أَمَرَ بِهِ فَأُهْرِيقَ .
It was narrated that Ibn ‘Abbas said:“Nabidh would be made for the Messenger of Allah (ﷺ) and he would drink it on the same day, or the next day, or the third day, and if there was any left he would throw it away or give orders that it was to be thrown away.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Sahih MuslimZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।