حَدَّثَنَا أَبُو بَدْرٍ، عَبَّادُ بْنُ الْوَلِيدِ حَدَّثَنِي مَعْمَرُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي رَافِعٍ، مَوْلَى النَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ حَدَّثَنِي أَبِي مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِيهِ عُبَيْدِ اللَّهِ عَنْ أَبِي رَافِعٍ قَالَ رَأَيْتُ بِلاَلاً يُؤَذِّنُ بَيْنَ يَدَىْ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ مَثْنَى مَثْنَى وَيُقِيمُ وَاحِدَةً .
It was narrated that Abu Rafi' said:"I saw Bilal calling the Adhan in fron of Allah's Messenger, (saying the phrases) two by two, and saying each phrase once in the Iqamah
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
Sahih LighairihiMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Very DaifShuaib Al Arnaut
DaifZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।