حَدَّثَنَا شُجَاعُ بْنُ مَخْلَدٍ أَبُو الْفَضْلِ، قَالَ حَدَّثَنَا هُشَيْمٌ، أَنْبَأَنَا أَبُو بِشْرٍ، عَنْ أَبِي الْمَلِيحِ بْنِ أُسَامَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُتْبَةَ بْنِ أَبِي سُفْيَانَ، حَدَّثَتْنِي عَمَّتِي أُمُّ حَبِيبَةَ، أَنَّهَا سَمِعَتْ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَقُولُ إِذَا كَانَ عِنْدَهَا فِي يَوْمِهَا وَلَيْلَتِهَا فَسَمِعَ الْمُؤَذِّنَ يُؤَذِّنُ قَالَ كَمَا يَقُولُ الْمُؤَذِّنُ .
Umm Habibah narrated that :When the Messenger of Allah was with her on her day and night, and heard the Mu'adh-dhin calling the Adhan, she heard him saying what he said
स्रोत में दर्ज दर्जे
DaifAl-Albani
DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।