حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُعَاوِيَةَ الْجُمَحِيُّ، حَدَّثَنَا ثَابِتُ بْنُ يَزِيدَ، عَنْ هِلاَلِ بْنِ خَبَّابٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَبِيتُ اللَّيَالِيَ الْمُتَتَابِعَةَ طَاوِيًا وَأَهْلُهُ لاَ يَجِدُونَ الْعَشَاءَ وَكَانَ عَامَّةَ خُبْزِهِمْ خُبْزُ الشَّعِيرِ .
It was narrated that Ibn ‘Abbas said:“The Messenger of Allah (ﷺ) used to spend many nights in a row hungry and his family could find no supper, and usually their bread was barley bread.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
HasanAl-Albani
HasanMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Hasan SahihShuaib Al Arnaut
Isnaad HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।