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सुनन इब्न माजा

नंबर 3345

नंबर 3345किताब 29, नंबर 95
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو أُسَامَةَ، حَدَّثَنَا هِشَامُ بْنُ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ لَقَدْ تُوُفِّيَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ وَمَا فِي بَيْتِي مِنْ شَىْءٍ يَأْكُلُهُ ذُو كَبِدٍ إِلاَّ شَطْرُ شَعِيرٍ فِي رَفٍّ لِي فَأَكَلْتُ مِنْهُ حَتَّى طَالَ عَلَىَّ فَكِلْتُهُ فَفَنِيَ ‏.‏
It was narrated that ‘Aishah said:“When the Prophet (ﷺ) passed away, there was nothing in my house that any living soul could eat, except a little bit of barley on a shelf of mine. I ate it for a long time, then I weighed it and soon it was all gone.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · Chapters on Food

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।