حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، حَدَّثَنَا أَبُو عَامِرٍ الْخَزَّازُ، عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ سَعْدٍ، مَوْلَى أَبِي بَكْرٍ - وَكَانَ سَعْدٌ يَخْدُمُ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ وَكَانَ يُعْجِبُهُ حَدِيثُهُ - أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ نَهَى عَنِ الإِقْرَانِ . يَعْنِي فِي التَّمْرِ .
It was narrated from Sa’d, the freed slave of Abu Bakr – and Sa’d used to serve the Messenger of Allah (ﷺ) and he liked this Hadith – that the Prophet (ﷺ) forbade eating two dates at once
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।