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सुनन इब्न माजा

नंबर 3313

नंबर 3313किताब 29, नंबर 63
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يَحْيَى، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَابِسٍ، أَخْبَرَنِي أَبِي، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ لَقَدْ كُنَّا نَرْفَعُ الْكُرَاعَ فَيَأْكُلُهُ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ بَعْدَ خَمْسَ عَشْرَةَ مِنَ الأَضَاحِيِّ ‏.‏
It was narrated that ‘Aishah said:“We used to store trotters and the Messenger of Allah (ﷺ) would eat them fifteen days after the sacrifice.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · Chapters on Food

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।