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सुनन इब्न माजा

नंबर 3283

नंबर 3283किताब 29, नंबर 33
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الأَحْمَرُ، عَنْ حَجَّاجٍ، عَنْ رِيَاحِ بْنِ عَبِيدَةَ، عَنْ مَوْلًى، لأَبِي سَعِيدٍ عَنْ أَبِي سَعِيدٍ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ إِذَا أَكَلَ طَعَامًا قَالَ ‏ "‏ الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَطْعَمَنَا وَسَقَانَا وَجَعَلَنَا مُسْلِمِينَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Sa’eed said:“Whenever the Prophet (ﷺ) ate, he would say: Al-hamdu lillahil-ladhi at’amana wa saqana wa ja’alana Muslimin (Praise is to Allah Who has fed us, given us to drink, and made us Muslims).”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · Chapters on Food

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।