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सुनन इब्न माजा

नंबर 3153

नंबर 3153किताब 26, नंबर 34
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو خَالِدٍ الأَحْمَرُ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، عَنْ عَبَّادِ بْنِ تَمِيمٍ، عَنْ عُوَيْمِرِ بْنِ أَشْقَرَ، أَنَّهُ ذَبَحَ قَبْلَ الصَّلاَةِ فَذَكَرَهُ لِلنَّبِيِّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فَقَالَ ‏ "‏ أَعِدْ أُضْحِيَّتَكَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Uwaimir bin Ashqar that he slaughtered before the prayer, and he mentioned that to the Prophet (ﷺ) who said:“Repeat your sacrifice.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • Sahih LighairihiMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · Chapters on Sacrifices

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।