सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन इब्न माजा

नंबर 3142

नंबर 3142किताब 26, नंबर 23
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الصَّبَّاحِ، حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ عَيَّاشٍ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ شُرَيْحِ بْنِ النُّعْمَانِ، عَنْ عَلِيٍّ، قَالَ نَهَى رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ أَنْ يُضَحَّى بِمُقَابَلَةٍ أَوْ مُدَابَرَةٍ أَوْ شَرْقَاءَ أَوْ خَرْقَاءَ أَوْ جَدْعَاءَ ‏.‏
It was narrated that ‘Ali said:“The Messenger of Allah (ﷺ) forbade sacrificing the Muqabalah, the Mudabarah, the Sharqa’, the Kharqa’ and the Jad’a’.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAl-Albani
  • DaifMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 26 · Chapters on Sacrifices

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।