حَدَّثَنَا هَدِيَّةُ بْنُ عَبْدِ الْوَهَّابِ، أَنْبَأَنَا الْفَضْلُ بْنُ مُوسَى، أَنْبَأَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ وَاقِدٍ، عَنْ عِلْبَاءَ بْنِ أَحْمَرَ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ كُنَّا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي سَفَرٍ فَحَضَرَ الأَضْحَى فَاشْتَرَكْنَا فِي الْجَزُورِ عَنْ عَشَرَةٍ وَالَبَقَرَةِ عَنْ سَبْعَةٍ .
it was narrated that Ibn ‘Abbas said:“We were with the Messenger of Allah (ﷺ) on a journey, and the (day of) Al-Adha came. We (sacrificed) one camel on behalf of ten (people) and one cow on behalf of seven.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
HasanShuaib Al Arnaut
Isnaad HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।