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सुनन इब्न माजा

नंबर 3112

नंबर 3112किताब 25, नंबर 231
حَدَّثَنَا بَكْرُ بْنُ خَلَفٍ، حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ هِشَامٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ مَنِ اسْتَطَاعَ مِنْكُمْ أَنْ يَمُوتَ بِالْمَدِينَةِ فَلْيَفْعَلْ فَإِنِّي أَشْهَدُ لِمَنْ مَاتَ بِهَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn ‘Umar that the Messenger of Allah (ﷺ) said:‘Whoever among you can die in Al-Madinah, let him do so, for I will bear witness in favor of those who die there.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।