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सुनन इब्न माजा

नंबर 3096

नंबर 3096किताब 25, नंबर 215
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَعَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا أَبُو مُعَاوِيَةَ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ أَهْدَى رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ مَرَّةً غَنَمًا إِلَى الْبَيْتِ فَقَلَّدَهَا ‏.‏
It was narrated that ‘Aishah said:“On one occasion the Messenger of Allah (ﷺ) sent sheep to the House, and he garlanded them.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।