حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا عِمْرَانُ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ أَبِي لَيْلَى، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَبْدِ الْكَرِيمِ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْحَارِثِ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، عَنْ عَلِيِّ بْنِ أَبِي طَالِبٍ، قَالَ أُتِيَ النَّبِيُّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ بِلَحْمِ صَيْدٍ وَهُوَ مُحْرِمٌ فَلَمْ يَأْكُلْهُ .
It was narrated that ‘Ali bin Abu Talib said:“The Prophet (ﷺ) brought some meat from some game when he was in Ihram, and he did not eat it.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
Sahih LighairihiShuaib Al Arnaut
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।