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सुनन इब्न माजा

नंबर 3087

नंबर 3087किताब 25, नंबर 206
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَمُحَمَّدُ بْنُ الْوَلِيدِ، قَالُوا حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، سَمِعْتُ قَتَادَةَ، يُحَدِّثُ عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، عَنْ عَائِشَةَ، أَنَّ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ قَالَ ‏ "‏ خَمْسٌ فَوَاسِقُ يُقْتَلْنَ فِي الْحِلِّ وَالْحَرَمِ الْحَيَّةُ وَالْغُرَابُ الأَبْقَعُ وَالْفَأْرَةُ وَالْكَلْبُ الْعَقُورُ وَالْحِدَأَةُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from ‘Aishah that the Prophet (ﷺ) said:“There are five vermin that might be killed whether one is in or outside the sacred precincts: the snake, the speckled crow, the mouse, the vicious dog, and the kite.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • SahihShuaib Al Arnaut
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।