حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ مُحَمَّدٍ، حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، حَدَّثَنَا جَرِيرُ بْنُ حَازِمٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُبَيْدِ بْنِ عُمَيْرٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ أَبِي عَمَّارٍ، عَنْ جَابِرٍ، قَالَ جَعَلَ رَسُولُ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ فِي الضَّبُعِ يُصِيبُهُ الْمُحْرِمُ كَبْشًا وَجَعَلَهُ مِنَ الصَّيْدِ .
It was narrated that Jabir said:“The Messenger of Allah (ﷺ) stipulated (the penalty of) a man for a hyena killed by a man in Ihram, and he considered it as game.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAl-Albani
SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
SahihShuaib Al Arnaut
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।