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सुनन इब्न माजा

नंबर 3077

नंबर 3077किताब 25, नंबर 196
حَدَّثَنَا أَبُو بَكْرِ بْنُ أَبِي شَيْبَةَ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، وَابْنُ، عُلَيَّةَ عَنْ حَجَّاجِ بْنِ أَبِي عُثْمَانَ، حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ أَبِي كَثِيرٍ، حَدَّثَنِي عِكْرِمَةُ، حَدَّثَنِي الْحَجَّاجُ بْنُ عَمْرٍو الأَنْصَارِيُّ، قَالَ سَمِعْتُ النَّبِيَّ ـ صلى الله عليه وسلم ـ يَقُولُ ‏ "‏ مَنْ كُسِرَ أَوْ عَرِجَ فَقَدْ حَلَّ وَعَلَيْهِ حَجَّةٌ أُخْرَى ‏"‏ ‏.‏ فَحَدَّثْتُ بِهِ ابْنَ عَبَّاسٍ، وَأَبَا، هُرَيْرَةَ فَقَالاَ صَدَقَ ‏.‏
It was narrated from ‘Ikrimah:“Hajjaj bin ‘Amr Ansari narrated to me, he said: ‘I heard the Prophet (ﷺ) say: “Whoever breaks a bone or becomes lame, has exited Ihram, but he must perform another Hajj.”
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAl-Albani
  • SahihMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।