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सुनन इब्न माजा

नंबर 3054

नंबर 3054किताब 25, नंबर 173
حَدَّثَنَا جُبَارَةُ بْنُ الْمُغَلِّسِ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ أَبِي شَيْبَةَ أَبُو شَيْبَةَ، عَنِ الْحَكَمِ، عَنْ مِقْسَمٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ ـ صلى الله عليه وسلم ـ كَانَ يَرْمِي الْجِمَارَ إِذَا زَالَتِ الشَّمْسُ قَدْرَ مَا إِذَا فَرَغَ مِنْ رَمْيِهِ صَلَّى الظُّهْرَ ‏.‏
It was narrated from Ibn ‘Abbas that the Messenger of Allah (ﷺ) used to stone the Pillars when the sun had passed its zenith, to the extent that, as soon as he finished stoning them, he would pray Zuhr
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Daif IsnaadAl-Albani
  • Daif IsnaadMuhammad Fouad Abd al-Baqi
  • DaifShuaib Al Arnaut
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Chapters on Hajj Rituals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।